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Saturday, December 16, 2017

2.21 रूसी कहानी "ताबूतसाज"

ताबूतसाज
मूल रूसी शीर्षकः Гробовщик (ग्रबव्श्शीक) ; कहानीकार - पुश्किन ;    मगही अनुवाद - नारायण प्रसाद
की नयँ देखते जा हिअइ हमन्हीं रोज दिन ताबूत,
पक्कल बाल जीर्ण होते विश्व के ?
          --- देर्झाविन [1]

ताबूतसाज (coffin-maker, undertaker) अद्रियान प्रोख़ोरोव के आखरी सर-समान शववाहिनी (मुरदा ले जाय वला गाड़ी) में लाद देल गेलइ, आउ मरियल घोड़ा के जोड़ी बस्मान्नयऽ गल्ली से निकीत्स्कयऽ गल्ली तक चौठा खेप घींचके ले गेलइ, जाहाँ परी ताबूतसाज अपन पूरा घरबार स्थानान्तरित कर लेलके हल । दोकान में ताला लगाके गेट पर एगो नोटिस ठोंक देलकइ कि घर बिकाऊ हइ, चाहे किराया पर देल जाय के हइ, आउ नयका घर दने पैदल चल पड़लइ । अपन पीला छोटकुन्ना घर भिर पहुँचते, जे ओकर कल्पना के एक अरसा से लोभइले हलइ आउ आखिरकार जेकरा एगो बड़गो रकम चुकाके खरदलके हल, वृद्ध ताबूतसाज के ई बात के हैरानी होलइ कि ओकर दिल खुश नयँ हइ । अनजान दहलीज पार करके आउ अपन नयका घर में घबराहट पाके अपन पुरनका टुट्टल-फुट्टल झोपड़ी के बारे उच्छ्वास लेलकइ, जाहाँ परी अठारह साल ऊ अत्यंत कड़ाई के साथ व्यवस्था कइलके हल; अपन दुन्नु बेटी आउ नौकरानी के सुस्ती पर बुरा-भला कहलकइ आउ खुद ओकन्हीं के मदत करे में लग गेलइ । जल्दीए व्यवस्था कायम हो गेलइ; प्रतिमादानी (icon stand) में देव प्रतिमा, अलमारी में चीनी मिट्टी के बरतन, टेबुल, सोफा आउ पलंग पिछला कमरा में नियत कइल कोना में रख देल गेलइ; भनसाघर आउ अतिथिकक्ष घर के मालिक के तैयार माल से भर गेलइ - सब तरह के रंग आउ हर तरह के साइज के ताबूत; मातमी टोप, लबादा आउ मशाल के साथ अलमारी भी । गेट पर एगो साइनबोर्ड टँग्गल हलइ, जेकरा पर हाथ में उलटा मशाल लेले स्थूलकाय आमूर [2] चित्रित कइल हलइ, जेकर निच्चे लिक्खल हलइ - "हियाँ सादा आउ रंगीन  ताबूत बेचल आउ मढ़ल जा हइ, आउ किराया पर भी देल जा हइ आउ पुरनकन के मरम्मत कइल जा हइ ।" लड़कियन अपन-अपन कमरा में चल गेते गेलइ । अद्रियान अपन घर के चक्कर लगइलकइ, छोटकुन्ना खिड़की भिर बैठ गेलइ आउ समावार तैयार करे लगी औडर देलकइ ।
शिक्षित पाठक तो जानऽ हथिन कि शेक्सपियर आउ वाल्टर स्कॉट दुन्नु अपन कब्र खोदे वलन के खुशमिजाज आउ विनोदी लोग के रूप में चित्रित कइलथिन हँ [3], ताकि ई प्रतिकूलता (contrast) के साथ हम सब के कल्पना के आउ अधिक प्रेरित कर सकइ । सच्चाई के प्रति आदर के चलते हम सब ओकन्हीं के अनुकरण नयँ कर सकऽ हिअइ आउ ई स्वीकार करे लगी विवश हिअइ कि हमर ताबूतसाज के मनोवृत्ति ओकर मनहूस पेशा के बिलकुल अनुरूप हलइ । अद्रियान प्रोख़ोरोव साधारणतः उदास आउ विचारमग्न रहऽ हलइ । ऊ अपन चुप्पी तभिए तोड़ऽ हलइ, जब खाली ओकरा अपन बेटियन के डाँटे-डपटे के रहऽ हलइ जब ऊ ओकन्हीं के पास से गुजरते मुसाफिर लोग तरफ खिड़की से बेफुस्टंग के हुलकके देखते पकड़ ले हलइ, चाहे ओकरा ऊ लोग से अपन समान के बढ़ा-चढ़ाके पैसा वसूल करे के रहऽ हलइ, जेकन्हीं के दुर्भाग्य से (आउ कभी-कभी सौभाग्य से) ओकरा खरदे के जरूरत पड़ऽ हलइ । आउ ओहे से अद्रियान खिड़की भिर बैठल अपन सतमा कप चाय पीके अपन हमेशे के उदास विचार में मग्न होल हलइ । ऊ मूसलधार बारिश के बारे सोच रहले हल, जे एक सप्ताह पहिले एगो सेवा-निवृत्त ब्रिगेडियर के दफन-जुलूस के ठीक नगर-द्वार पर पहुँचतहीं शुरू हो गेले हल । कइएक लबादा ओकरा चलते सिकुड़ गेले हल, कइएक टोपी विकृत हो गेले हल । ऊ अनिवार्य खर्च के पहिलहीं भाँप गेलइ, काहेकि अंत्येष्टि पोशाक के ओकर पुरनका स्टॉक दयनीय स्थिति में आल हलइ । ऊ आशा करऽ हलइ कि बूढ़ी सेठानी त्रूख़िना के मरला पर ओकर घाटा पूरा हो जइतइ, जे लगभग एक साल से मृत्यु-शय्या पर पड़ल हलइ। लेकिन त्रूख़िना राज़गुल्याय में अपन आखरी साँस गिन रहले हल, आउ प्रोख़ोरोव के डर हलइ कि ओकर उत्तराधिकारी सब, अपन वादा के बावजूद, एतना दूर ओकरा लगी बोलावा भेजे में कहीं आसकत नयँ करते जाय आउ कोय नगीच के ठेकेदार से कहीं मामला नयँ तय कर लेते जाय ।
ई विचार-शृंखला में अचानक फ़्रीमेसन (Freemason) नियन दरवाजा पर तीन दस्तक [4] से विघ्न पड़ गेलइ।
"केऽ हकऽ ?" ताबूतसाज पुछलकइ ।
दरवाजा खुललइ, आउ एगो अइसन अदमी, जेकरा पहिलहीं नजर में जर्मन शिल्पी के रूप पछानल जा सकऽ हलइ, कमरा में प्रवेश कइलकइ आउ प्रसन्न मुद्रा में ताबूतसाज के नगीच अइलइ ।
"प्रिय पड़ोसी, हमरा माफ करथिन", ऊ अइसन रूसी शैली में कहलकइ, जेकरा आझो हँस्से बेगर नयँ सुन सकऽ हिअइ, "बाधा डाले खातिर हमरा माफ करथिन ... हमरा जल्दी से जल्दी अपने के साथ परिचित होवे के मन कइलकइ । हम मोची हिअइ, हमर नाम गोटलीब शुल्ट्स (Gottlieb Schultz) हइ, आउ रोड के पार अपने के खिड़की के सामने वला ऊ छोटका घर में रहऽ हिअइ । कल हम अपन विवाह के रजत जयन्ती मना रहलिए ह, आउ निवेदन करऽ हिअइ कि अपने अपन बेटी सहित हमरा हीं मित्रवत् भोजन करथिन ।"
निमंत्रण सहर्ष स्वीकार कर लेल गेलइ । ताबूतसाज मोची के बैठे लगी आउ एक कप चाय पीए लगी कहलकइ, आउ गोटलीब शुल्ट्स के खुल्लल विचार होवे से जल्दीए ओकन्हीं बीच मित्रतापूर्ण बातचीत होवे लगलइ ।
"अपने के धंधा कइसन चल रहले ह श्रीमान ?" अद्रियान पुछलकइ ।
"ए-हे-हे", शुल्ट्स उत्तर देलकइ, "कइसूँ चल रहले ह । शिकायत नयँ कर सकऽ हिअइ । हलाँकि, निस्संदेह, हमर धंधा ओइसन नयँ हइ जइसन कि अपने के - जिंदा अदमी बिन बूट के काम चला सकऽ हइ, लेकिन मुरदा तो ताबूत के बेगर नयँ रह सकऽ हइ ।"
"ई तो बिलकुल सच बात हइ", अद्रियान टिप्पणी कइलकइ; "लेकिन अगर जिंदा अदमी के पास बूट खरीदे लगी पैसा नयँ हइ, त गोस्सा में आवे के कोय बात नयँ हइ, ऊ नंगे पाँव भी चल्लऽ हइ; लेकिन मरल भिखारी के तो मुफ्ते में ताबूत मिल जा हइ ।"
ई तरह ओकन्हीं के बातचीत आउ कुछ समय तक चलते रहलइ; आखिरकार मोची उठलइ आउ अपन निमंत्रण दोहरइते ताबूतसाज से विदा लेलकइ ।
दोसर दिन ठीक बारह बजे ताबूतसाज आउ ओकर बेटियन नयका खरदल घर के दरीचा (छोटका दरवाजा, wicket gate) से बहरसी निकसते गेलइ आउ पड़ोसी के घर दने बढ़लइ । आझकल के उपन्यासकार लोग के अइसन अवसर पर बन्नल परंपरा से हटके, न तो हम अद्रियान प्रोख़ोरोव के कफ़्तान के वर्णन करे जाब करऽ हिअइ आउ न तो अकुलिना आउ दारिया के यूरोपीय पोशाक के । लेकिन हम एतना बता देना अनावश्यक नयँ समझऽ हिअइ कि दुन्नु लड़कियन पीयर टोपी आउ लाल जुत्ता पेन्हऽ हलइ, जे ओकन्हीं के साथ खाली जश्न के अवसर पर हीं होवऽ हलइ ।
मोची के छोटकुन्ना फ्लैट अतिथि लोग से खचाखच भरल हलइ, अधिकांश जर्मन शिल्पी लोग से, ओकन्हीं के पत्नी आउ प्रशिक्षु (apprentices) से । सरकारी कर्मचारी में से खाली एगो संतरी यूर्को हलइ, जे चुख़ोन (ऊ बखत पितिरबुर्ग के आसपास रहे वला एस्तोनिया अथवा फ़िनलैंड वासी) हलइ, आउ जे अपन मामूली पद के बावजूद मेजबान के विशेष अनुग्रह प्राप्त कइले हलइ । पचीस साल ऊ एहे पद पर विश्वास आउ निष्ठा से सेवा कइलकइ, पोगोरेल्स्की के डाकिया नियन [5] । सन् बारह (अर्थात् 1812), जे प्राचीनतम राजधानी (मास्को) के नष्ट कर देलकइ, ओकर पियरका संतरी-चौकी (sentry-box) के भी नष्ट कर देलकइ । लेकिन तुरतम्मे, दुश्मन के खदेड़ देवल गेला के बाद, ऊ स्थान पर एगो नयका बन गेलइ - सलेटी रंग के आउ छोटगर उज्जर यूनानी (Doric) स्तंभ के साथ, आउ यूर्को "परशु के साथ आउ घर के बन्नल कवच में " [6] ओकरा सामने फेर से चहलकदमी करे लगलइ । ऊ अधिकांश जर्मन लोग से परिचित हलइ, जे निकित्स्की गेट के आसपास रहऽ हलइ - ओकन्हीं में से कुछ लोग कभी-कभी रविवार से सोमवार के रात यूर्को के पास भी गुजारते जा हलइ । अद्रियान तुरतम्मे ओकरा साथ परिचय कर लेलकइ, जे अइसन अदमी हलइ जेकर देर चाहे सबेर जरूरत पड़ सकऽ हलइ, आउ जब अतिथि सब टेबुल भिर गेते गेलइ, त ओकन्हीं साथ-साथ बैठते गेलइ । मिस्टर आउ मिसेज़ शुल्ट्स आउ ओकन्हीं के सतरह साल के बिटिया, लोत्ख़ेन, अतिथि लोग के साथ भोजन करते बखत खिलावे-पिलावे में आउ रसोइया के परसे में लगातार मदत करते गेलइ । बियर तो बह रहले हल । यूर्को चार अदमी के बराबर खाब करऽ हलइ; अद्रियान ओकरा से बराबरी करे में पीछू नयँ हलइ; ओकर बेटियन शिष्टतापूर्वक व्यवहार कइलकइ; जर्मन भाषा में बातचीत लगातार अधिकाधिक कोलाहलपूर्ण होब करऽ हलइ। अचानक मेजबान ध्यान देवे लगी घोषणा कइलकइ आउ तारकोल से सील कइल बोतल के खोलते रूसी में जोर से बोललइ - "हमर दयालु लुइज़ा के स्वास्थ्य खातिर !"
हलका शैम्पेन के फेन उड़े लगलइ । मेजबान चालीस साल के अपन अर्द्धांगिनी के तजगर चेहरा के प्यार से चुमलकइ, आउ अतिथि लोग शोर मचइते दयालु लुइज़ा के स्वास्थ्य के जाम पीते गेलइ । "हमर प्यारे अतिथिगण के स्वास्थ्य खातिर !" दोसरका बोतल के कॉर्क खोलते मेजबान घोषणा कइलकइ - आउ अतिथिगण अपन-अपन जाम फेर से खाली करते ओकरा धन्यवाद देते गेलइ । हियाँ परी स्वास्थ्य के शुभकामना खातिर एक के बाद दोसरा जाम चालू होलइ - हरेक विशेष अतिथि के स्वास्थ्य खातिर जाम पीते गेलइ, मास्को आउ दर्जन भर जर्मन छोटगर-छोटगर शहर के स्वास्थ्य खातिर पीते गेलइ, सामान्य रूप से सब्भे आउ विशेष रूप से हरेक कर्मशाला (workshop, guild) के स्वास्थ्य के जाम पीते गेलइ,  मास्टर आउ प्रशिक्षु (masters and apprentices) के स्वास्थ्य के जाम पीते गेलइ । अद्रियान धुन में पी रहले हल आउ एतना खुश हलइ कि खुद कइसनो विनोदपूर्ण जाम पीए के प्रस्ताव रखलकइ । अचानक अतिथि लोग के बीच में से एगो मोटगर नानबाई (baker)  अपन जाम उपरे उठइलकइ आउ चिल्लइलइ - "ऊ लोग के स्वास्थ्य के खातिर, जिनका लगी हमन्हीं काम करऽ हिअइ, उन्ज़ेरर कुंड्ल्वाइटऽ ! [unserer Kundleute ! - (जर्मन) अपन ग्राहक लोग!] ई प्रस्ताव के, बाकी सब नियन, खुशी से आउ एकमत से स्वागत कइल गेलइ । अतिथि लोग एक दोसरा के सामने सिर झुकावे लगलइ, दर्जी मोची के, मोची दर्जी के, नानबाई ओकन्हीं दुन्नु के, सब कोय नानबाई के, इत्यादि । ई प्रकार के पारस्परिक अभिवादन के बीच, अपन पड़ोसी तरफ संबोधित करते यूर्को चिल्लइलइ - "त फेर ? त भाय, अपन मृतक लोग के स्वास्थ्य के खातिर जाम पीयऽ ।" सब कोय ठठाके हँस पड़लइ, लेकिन ताबूतसाज खुद के अपमान समझलकइ आउ ऊ नाक-भौं सिकोड़ लेलकइ । कोय ई बात के नोटिस नयँ कइलकइ, अतिथि लोग पीते रहलइ, जखने ओकन्हीं टेबुल भिर से उठते गेलइ त संध्या-वंदन के घंटी बज रहले हल ।  
अतिथि सब देर से विदा होते गेलइ, आउ अधिकांश नशा में धुत्त । मोटका नानबाई आउ जिल्दसाज, जेकर चेहरा लाल मराको (morocco) में  जिल्द चढ़ल लग रहले हल [7], यूर्को के बाँह पकड़के ओकर संतरी-चौकी में ले गेते गेलइ, जे ई हालत में रूसी कहावत के चरितार्थ करते गेलइ - "ऋण के शोभा एकर भुगताने करे में हइ।" (अर्थात् केकरो कइल एक भला काम के बदले ओकरो लगी भले काम करे के चाही ।) ताबूतसाज नशा में धुत्त आउ गोसाल घर अइलइ ।
"वास्तव में ई सब की हइ ?" ऊ जोर-जोर से तर्क कर रहले हल, "दोसर के धंधा के तुलना में हमर धंधा कइसे कम आदरणीय हइ ? की ताबूतसाज जल्लाद के भाय हइ ? काहे लगी हँस्सऽ हइ ई काफ़िर सब ? की वास्तव में ताबूतसाज क्रिस्मस उत्सव के एगो विदूषक हइ ? हम तो ओकन्हीं के गृहप्रवेश के पार्टी में निमंत्रित करे वला हलिअइ, ओकन्हीं के बड़गो भोज देवे वला हलिअइ - लेकिन अब ई नयँ होवे वला ! आउ हम ओकन्हीं के निमंत्रित करबइ जेकरा लगी हम काम करऽ हिअइ - ईसाई धर्म के श्रद्धालु मृतक लोग के ।"
"ई की हइ, मालिक ?" ओकर नौकरानी बोललइ, जे अभी ओकर बूट काढ़ब करऽ हलइ, "ई की बकवास करब करऽ हथिन ? क्रॉस करथिन ! गृहप्रवेश के पार्टी में मुरदा सब के निमंत्रण देथिन ! कइसन भयानक बात हइ !"
"भगमान कसम, हम निमंत्रण देबइ", अद्रियान बात जारी रखलकइ, "आउ बिहाने । हमर हित-चिन्तक लोग, अपने के स्वागत हइ, कल शाम के हमरा हीं भोज में आते जाथिन; जे कुछ भगमान भेजथिन, ओहे सेवा में हाजिर करबइ ।" एतना कहके ताबूतसाज बिस्तर पर चल गेलइ आउ जल्दीए खर्राटा भरे लगलइ ।
प्रांगण में अभियो अन्हेरे हलइ जब अद्रियान के जगा देल गेलइ । सेठानी त्रूख़िना एहे रात के गुजर गेले हल, आउ ओकर प्रबंधक (steward) के हियाँ से एगो संदेशवाहक ई संदेश लेके सरपट घोड़ा दौड़इते अइलइ । ताबूतसाज एकरा लगी ओकरा वोदका लगी एक ग्रिव्ना (दस कोपेक) देलकइ, जल्दी से कपड़ा पेन्हलकइ, किराया पर एगो कोचवान लेलकइ आउ राज़गुल्याय चल पड़लइ । मरल बुढ़िया के गेट भिर पहिलहीं से पुलिस खड़ी हलइ आउ व्यापारी लोग कौआ नियन लाश के गन्ह पाके चहलकदमी कर रहते गेले हल । मोम नियन पीयर होल मरल बुढ़िया टेबुल पर पड़ल हलइ [8], लेकिन अभियो तक सड़के विकृत नयँ होले हल । ओकरा पास रिश्तेदार, पड़ोसी आउ घर के नौकर-चाकर भीड़ लगइले हलइ । सब खिड़की खुल्लल हलइ; मोमबत्ती जल रहले हल; पादरी लोग प्रार्थना कर रहले हल । अद्रियान त्रूख़िना के भतीजा बिजुन गेलइ, जे एगो नवयुवक व्यापारी हलइ आउ फैशनदार फ्रॉक-कोट पेन्हले हलइ, आउ ओकरा बतइलकइ कि ताबूत, मोमबत्ती, कफन आउ दोसर-दोसर दफन के सामान बिलकुल ठीक-ठाक हालत में ओकरा पास तुरंत भेज देल जइतइ । उत्तराधिकारी ओकरा अन्यमनस्कता से धन्यवाद देलकइ, ई कहके कि कीमत के बारे ऊ मोल-जोल नयँ करतइ, बल्कि ओकर (ताबूतसाज के) ईमानदारी पर सब कुछ छोड़ देतइ । ताबूतसाज अपन हमेशे के आदत के मोताबिक भगमान के कसम खइलकइ कि ऊ फालतू कुछ नयँ लेतइ; ऊ अर्थपूर्ण ढंग से प्रबंधक (steward) के साथ नजर मिलइलकइ आउ अपन काम में लग गेलइ । सारा दिन ऊ रज़गुल्याय से निकित्स्की गेट तक आउ फेर वापिस घोड़ागाड़ी पर चक्कर काटते रहलइ; शाम तक सब काम निपटा लेलकइ आउ अपन कोचवान के मुक्त करके पैदल घर रवाना हो गेलइ । चाँदनी रात हलइ । ताबूतसाज निकित्स्की गेट तक सही-सलामत पहुँच गेलइ । स्वर्गारोहण (Ascension) के गिरजाघर बिजुन ओकर परिचित यूर्को ओकरा हाँक मालकइ आउ ताबूतसाज के पछानके ओकरा शुभरात्रि के कामना कइलकइ । देर हो चुकले हल । ताबूतसाज अपन घर भिर जइसीं पहुँचलइ कि अचानक ओकरा लगलइ कि कोय तो ओकर फाटक भिर अइलइ, विकेट (wicket) खोललकइ आउ ओकरा से अंदर जाके गायब हो गेलइ ।
"एकर की मतलब हो सकऽ हलइ ?" अद्रियान सोचलकइ । "केकरा फेर से हमर जरूरत हइ ? कहीं कोय चोर तो हमर घर में नयँ घुस गेलइ ? कि कहीं हमर दुन्नु बेवकूफ (लड़की) से मिल्ले लगी प्रेमी लोग तो नयँ अइते-जइते रहऽ हइ ? कुच्छो हो सकऽ हइ !" आउ ताबूतसाज मदत लगी अपन सुहृद् यूर्को के पुकारहीं वला हलइ। एतने में कोय तो आउ विकेट भिर अइलइ आउ अंदर आहीं वला हलइ, लेकिन घर के मालिक के दौड़ते अइते देखके रुक गेलइ आउ तिकोनी टोपी उतार लेलकइ । अद्रियान के ओकर चेहरा जानल-पछानल लगलइ, लेकिन ततलब्जी में ओकरा देखके निम्मन से पछान नयँ पइलकइ ।
"अपने हमरा हीं अइलथिन हँ", अद्रियान हँफते कहलकइ, "अंदर आथिन, किरपा करके पधारथिन ।"
"औपचारिकता के फेर में नयँ पड़ऽ, बबुआ", धीमे स्वर में ऊ उत्तर देलकइ, "आगू-आगू चलऽ; अतिथि लोग के रस्ता देखावऽ !"
अद्रियान के औपचारिकता खातिर समय नयँ हलइ । विकेट गेट खुल्ला हलइ, ऊ ज़ीना पर चढ़के उपरे गेलइ आउ आगंतुक ओकर पीछू-पीछू । अद्रियान के लगलइ कि ओकर कमरा सब में लोग चल-फिर रहले ह । "ई की हो रहले ह !" ऊ सोचलकइ आउ तेजी से अंदर गेलइ ... हिएँ परी ओकर गोड़ जवाब दे देलकइ । कमरा लाश से भरल हलइ । खिड़की से आ रहल चाँदनी ओकन्हीं के पीयर आउ नीला चेहरा, अंदर घुस्सल मुँह, धुँधला अर्द्धनिमीलित (आधा बंद) आँख आउ आगू तरफ निकसल नाक के प्रकाशित कर रहले हल ... अद्रियान आतंकित होल ऊ सब लोग के पछान लेलकइ, जेकन्हीं के ओकर प्रयास से दफनावल गेले हल, आउ अपन साथ अंदर घुस्सल ब्रिगेडियर के, जेकरा मूसलाधार बारिश के दौरान दफनावल गेले हल । ओकन्हीं सब्भे, महिला आउ पुरुष, सिर झुकाके अभिवादन के साथ ताबूतसाज के घेर लेते गेलइ, सिवाय एगो गरीब अदमी के, जेकरा हाले में मुफ्त में दफनावल गेले हल आउ जे अपन चिथड़ा (गुदड़ी) के कारण लजाल नगीच नयँ अइलइ आउ नम्रतापूर्वक एगो कोना में खड़ी हलइ । बाकी सब निम्मन कपड़ा पेन्हले हलइ - मृतक महिला सब रिब्बन लगल टोपी में, मृतक सरकारी कर्मचारी लोग वरदी में, लेकिन बिन दाढ़ी बनइले, व्यापारी लोग उत्सव वला कफ्तान में ।
"देखऽ हीं, प्रोख़ोरोव", सब आदरणीय अतिथि लोग के तरफ से ब्रिगेडियर कहलकइ, "हमन्हीं सब्भे तोर निमंत्रण पर कब्र से उठके अइते गेलियो ह; घर पर खाली ओहे सब रह गेले ह, जे दुर्बल हो चुकले ह, जे बिलकुल सड़-गल चुकले ह, आउ जेकर बिन चमड़ा के खाली हड्डी बच गेले ह, लेकिन एकन्हिंयों में से एगो के आवे बेगर नयँ रहल गेलइ - एतना ओकरा तोरा से भेंट करे के मन करब करऽ हलइ ..."
एतने में छोटकुन्ना अस्थिपंजर (कंकाल) भीड़ के चीरते अद्रियान भिर अइलइ ।  ओकर खोपड़ी स्नेहपूर्वक ताबूतसाज के तरफ देखते मुसकइलइ । हलका हरियर आउ लाल रंग के चिथड़ा आउ तार-तार होल कपड़ा ओकरा पर डंडा पर नियन लटक रहले हल, आउ ओकर गोड़ के हड्डी ओकर जैकबूट में ऊखड़ी में समाठ नियन बज रहले हल ।
"तूँ हमरा पछानलऽ नयँ, प्रोख़ोरोव", कंकाल बोललइ । "तोरा गार्ड सेना के भूतपूर्व सर्जेंट प्योत्र पित्रोविच कुरील्किन के आद पड़ऽ हको, ओहे जेकरा सन् 1799 में तूँ अपन पहिला ताबूत बेचलहो हल - आउ जेकरा बलूत (oak) के लकड़ी के बन्नल बतइलहो हल ?" एतना कहके मृतक ओकरा आलिंगन करे लगी अपन हड्डी के बाँह फैलइलकइ - लेकिन अद्रियान अपन पूरा ताकत लगाके चिल्लइलइ आउ ओकरा ढकेल देलकइ । प्योत्र पित्रोविच लड़खड़इलइ, गिर पड़लइ आउ ओकर कंकाल चकनाचूर हो गेलइ । मृतक लोग के बीच गोस्सा के भुनभुनाहट चालू हो गेलइ; सब कोय अपन साथी के प्रतिष्ठा के पक्ष में खड़ी हो गेते गेलइ, गारी आउ धमकी के साथ अद्रियान बिजुन आ गेते गेलइ, आउ बेचारा मेजबान ओकन्हीं के चीख से आउ लगभग कुचलाल अपन प्रत्युत्पन्नमति (presence of mind) खो देलकइ, खुद गार्ड सेना के सेवानिवृत्त सर्जेंट के हड्डी के ढेर पर गिर पड़लइ आउ बेहोश हो गेलइ ।
सूरज कब के ऊ बिस्तर के प्रकाशित कर रहले हल, जेकरा पर ताबूतसाज पड़ल हलइ । आखिरकार ऊ आँख खोललकइ आउ अपन सामने नौकरानी के देखलकइ, जे समावार गरम करे खातिर कोयला के फूँक मार रहले हल । आतंक के साथ अद्रियान के कल के सब्भे घटना आद पड़लइ । त्रूख़िन, ब्रिगेडियर आउ सर्जेंट कुरील्किन ओकर कल्पना में धुँधला सन देखाय देब करऽ हलइ । ऊ चुपचाप इंतजार करे लगलइ कि नौकरानी ओकरा साथ कोय बातचीत चालू करइ आउ ई बताबइ कि रात के साहसिक कार्य (adventures) के परिणाम की होलइ ।
"केतना देर तक तूँ सुत्तल रहलऽ, बबुआ, अद्रियान प्रोख़ोरोविच", ओकरा ड्रेसिंग गाउन देते अकसिन्या कहलकइ। "तोरा हीं पड़ोसी दर्जी अइलो हल, आउ हियाँ के संतरी दौड़ल सूचना देवे अइलो हल कि आझ पुलिस चीफ़ के नामकरण दिन हइ, लेकिन तूँ तो सुत्तल हलहो, आउ हमन्हीं तोरा जगावे लगी नयँ चहलियो।"
"आउ स्वर्गीया त्रूख़िना के हियाँ से हमरा हीं कोय अइते गेले हल ?"
"स्वर्गीया ? की वास्तव में ऊ मर गेलइ ?"
"कइसन बेवकूफ हकँऽ ! की तूँ कल्हे ओकर अंत्येष्टि के प्रबंध करे में हाथ नयँ बँटइलहीं हल ?"
"ई तूँ की कह रहलऽ ह, बबुआ ? की तूँ पगलाऽ गेलऽ ह, कि कहीं कल्हे के नशा के खुमार अभी तक गेलो नयँ? कल्हे कइसन अंत्येष्टि हलइ ? कल्हे तो सारा दिन तूँ जर्मन के हियाँ भोज में हलऽ, नशा में धुत्त वापिस अइलऽ, बिछौना पर पड़ गेलऽ, आउ अभी तक सुत्तल हलऽ, गिरजाघर के प्रार्थना सभा (mass) के घंटी कब के बज चुकलइ ।"
"अरे सचमुच !" खुश होल ताबूतसाज बोललइ ।
"बिलकुल", नौकरानी उत्तर देलकइ ।
"अगर ई बात हइ, त झटपट चाय दे, आउ हमर बेटियन के बोलाव ।"

टिप्पणी:
[1] देर्झाविन - गव्रीला रमानोविच देर्झाविन (1745-1816) पुश्किन के पीढ़ी के ठीक पहिले के एगो महानतम कवि हलथिन । ई सूक्ति उनकर कविता “Водопад” (जल-प्रपात) (1794) से उद्धृत हइ, जे साम्राज्ञी एकातेरिना महान के जेनरल (सेनापति) आउ कृपापात्र राजकुमार ग्रिगोरी  अलिक्सान्द्रोविच पोतेम्किन (1739-1791) के स्मृति में लिखलथिन हल ।
[2] आमूर - कामदेव, लेकिन हाथ में उलटा मशाल के साथ यमदूत या मृत्यु के प्रतीक ।
[3] पुश्किन के अभिप्राय विलियम शेक्सपियर (1564-1616) के नाटक "Hamlet" (1599-1602), अंक-4, दृश्य-1 से, आउ वाल्टर स्कॉट (1771-1832) के उपन्यास "The Bride of Lammermoor" (1819) के अध्याय-24 से हइ ।
[4] अठरहमी शताब्दी के उत्तरार्द्ध में एगो रहस्यवादी संगठन, जेकर लक्ष्य मानव नैतिक पुनरुत्थान हलइ । दरवाजा पर तीन दस्तक ई संगठन के सदस्य लोग के एगो संकेत हलइ ।
[5] पोगोरेल्स्की के डाकिया - काउंट अलिक्सेय पिरोव्स्की (1787-1836), उपनाम अन्तोन पोगोरेल्स्की के कहानी-संग्रह "Двойник, или Мои вечера в Малороссии" (जुड़मा, या यूक्रेन में हमर शाम) में से एगो कहानी "Лафертовская маковница" (लाफ़ेर्त के नानबाइन) (1825) के एगो पात्र के नाम ।
[6] "परशु के साथ आउ घर के बन्नल कवच में " - अलिक्सान्द्र इज़मायलोव (1779-1831) के काव्यात्मक कहानी "Дура Пахомовна" (बेवकूफ पख़ोमोव्ना) से उद्धृत (दे॰ पोल्नए सब्रानिए सचिनेनी आ.ये. इज़मायलोवा, खंड-1, मास्को, 1890, पृ॰186) ।
[7] "जेकर चेहरा लाल मराको (morocco) में  जिल्द चढ़ल लग रहले हल" - रूसी साम्राज्ञी एकातेरिना महान के शासनकाल में प्रसिद्ध नाटककार याकोब बरीसोविच क्न्याज़निन (1742- 1791) के प्रहसन "Хвастун" (शेखीबाज) (1786) से कुछ परिवर्तित पंक्ति (अंक 3, दृश्य 6) ।

[8] "मरल बुढ़िया टेबुल पर पड़ल हलइ" - रिवाज के अनुसार मुरदा के टेबुल पर पाड़के तब तक रक्खल जा हलइ जब तक कि ताबूत नयँ लावल जा हलइ ।